बेघरों के अधिकार

  वर्तमान  अनुबंध के अनुसार हर सदस्य देश को हर व्यक्ति और उसके परिवार को प्राप्त स्टैंडर्ड के जीवन-यापन के अधिकार को मान्यता देनी होगी। साथ में पर्याप्त भोजन, कपड़ा और आवास और लगातार जीवन-यापन के स्तर में सुधार की व्यवस्था भी करनी होगी। सदस्य देशों को इस अधिकार को अमल में लाने के लिये, और मुक्त सहमति के आधार पर इंटरनेशनल को-ऑपरेशन के आवश्यक महत्व को मान्यता देते हुये पर्याप्त कदम उठाने होंगे।” हालांकि भारत के इस अनुबंध पर एक हस्ताक्षर कर्ता होते हुये भी यहाँ पर नागरिकों के इन अधिकारों को लागु करने के लिये कुछ खास कार्य नहीं किया गया है।

  पर्याप्त आवास के अधिकार को विशेष समुदाय के अधिकारों को सुरक्षा देने की आवश्यकता पर ध्यान केंद्रित करने के लिये और दूसरे बहुत सारे माध्यमों ने भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता दी है जैसे कि CEDAW (Committee on the Elimination of Discrimination against Women), CRC (Committee on Rights of the Child) और CERD (Committee on the Elimination of Racial Discrimination) और इसके अलावा आवास को मूल मानव अधिकार के तौर पर मानते हुये भी कुछ विशेष टिप्पणियाँ की गयी है। भारतीय उच्चतम न्यायालय में आर्थिक समानता, जो कि मूल संवैधानिक उद्देश्य भी है, जैसे बड़े लक्ष्य को प्राप्त करने के लिये आवास के अधिकार को सुनिश्चित करने पर विशेष जोर दिया है। जुवेनाईल जस्टिस (Care and Protection of Children) एक्ट 2000 (जे जे एक्ट) 18 साल से कम उम्र के बेघर व्यक्ति को जे जे एक्ट के अंर्तगत मानकर व्यवहार करना चाहिये। चाईल्ड वेलफेयर कमेटी के द्वारा उनकी देखभाल की आवश्यकता के अनुसार की जानी चाहिये। एक एक्ट के अंतर्गत और भी कई विकल्प आते है जैसे कि बच्चे को उसके परिवार को लौटा दिया जाये, गोद देने के लिये रखा जाये या चिल्ड्रन होम भेज दिया जाए। हालांकि Quality Institutional Care and Alternatives for Children (Maharashtra) संगठन द्वारा 20032004 में की गयी स्टडी के अनुसार जे जे एक्ट के गंभीर उल्लंघन देखने में आये हैं, जिनमें संसाधनों और पुनर्वासन की कमी भी शामिल है। बहुत से सड़क के बच्चों को सहायता प्रदान करने की बजाय पुलिस के द्वारा उनकी निर्दयता से पिटाई तक की गयी।

दि नेशनल यूथ पॉलिसि, 2003 : इस पॉलिसि का उद्देश्य देश के 13 से 35 साल के युवकों के अंदर नागरिकता के गुण विकसित करना, धर्मनिरपेक्षता के सिद्धांतों को उनके मन में बिठाना ताकि शांति और सामंजस्य स्थापित किये जा सकें। यह पॉलिसि सुनिश्चित करती है कि युवकों को रोजगार पाने में मदद के लिये उन्हें समुचित शिक्षा और प्रशिक्षण के अवसर प्रदान किये जाये, उन्हें आवास, साफ वातावरण, प्राथमिक चिकित्सा सेवायें हर तरह के शोषण

से सुरक्षा, युवाओं से संबंधित निर्णय लेने वाली संस्थाओं में यथायोग्य हिस्सेदारी और उनके समुचित विकास के लिये प्याप्त मात्रा में फंउ आवंटित किया जाये।

दि बॉम्बे प्रिवेन्शन ऑफ बैगरी एक्ट 1959 : यह बेघरों को प्रभावित करने वाला एक मुख्य एक्ट है। इस एक्ट के अनुसार सड़क पर भीख मांगने या चीजें बेचने वाले को गिरफ्तार किया जा सकता है। इसके अनुसार बिना किसी प्रत्यक्ष निर्वाह के साधन के अगर कोई व्यक्ति सार्वजनिक स्थानों पर समय व्यतीत करते पाया जाता है तो उसे भिखारी का दर्जा दिया जा सकता है। (BPBA, Section 2 (1) (d)) इसी की वजह से एक बेघर को जो जीविका के लिये सड़क पर कठिन परिश्रम करता है. बेइज्जत किया जाता है और अपराधी की तरह हिरासत में लिया जाता है।